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31 मई के बाद महाकाल, हरसिद्धि, मंगलनाथ, कालभैरव मंदिर में फिर हो सकते हैं दर्शन
उज्जैन. 31 मई के बाद शहर के मंदिरों में श्रद्धालुओं का प्रवेश शुरू किया जा सकता है। बुधवार को मंदिरों के प्रबंधकों ने मंदिरों में पहुंचकर व्यवस्थाओं को ठीक करने की शुरुआत कर दी है। लॉकडाउन को दो महीने हो चुके हैं। पुजारियों और अन्य धर्माचार्यों द्वारा लॉकडाउन से मंदिरों और तीर्थ स्थलों को मुक्त करने की मांग लगातार की जा रही है। बुधवार शाम महाकालेश्वर मंदिर समिति के प्रशासक एसएस रावत मंदिर पहुंचे। उन्होंने मंदिर के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ चर्चा की। मंदिर की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। हालांकि पॉजिटिव केस बढ़ने और सोशल डिस्टेंस का पालन नहीं करने से लॉकडाउन बढ़ाने पर भी विचार चल रहा है।
सैनिटाइजर की जगह साबुन के पानी का उपयोग हो
पुजारी कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए मंदिरों में विशेष प्रबंध करने का सुझाव दे रहे हैं। उनका मानना है कि दर्शन चालू करने के पहले मंदिरों में दर्शनार्थियों और मंदिर समिति के लिए गाइडलाइन जारी होना चाहिए। यानी प्रबंध समिति क्या व्यवस्था करेगी और दर्शनार्थियों को किन शर्तों का पालन करना होगा। महाकाल मंदिर समिति के सदस्य पं.आशीष गुरु का कहना है कि मंदिर में प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं और कर्मचारियों के लिए सुरक्षा की व्यवस्था जरूरी है। अल्कोहल वाला सैनिटाइजर मंदिर में नहीं चल सकता। इसके स्थान पर साबुन के पानी का उपयोग किया जा सकता है।
सिद्धवट, रामघाट पर पिंडदान भी कर सकेंगे लोग
मंदिर में कर्मचारियों, पुजारियों, अधिकारियों, वीआईपी के प्रवेश और निर्गम मार्ग तय होना जरूरी है। पूजन सामग्री लाने ले जाने की व्यवस्था तय करना होगी। सार्वजनिक वाॅशरूम में सेंसर वाले नल होना चाहिए। कर्मचारियों को संक्रमण रोकने के लिए किए जाने वाले उपायों का प्रशिक्षण भी जरूरी है। एक बार में कितने श्रद्धालुओं को प्रवेश देंगे, उनकी जांच, सोशल डिस्टेंसिंग व्यवस्था जैसे अनेक बिंदू हैं। तीर्थ पुरोहित पं. सुरेंद्र चतुर्वेदी का कहना है सिद्धवट, रामघाट आदि पर मृृत्यु बाद होने वाले कर्म नहीं हो पा रहे। इसके लिए गाइडलाइन जारी कर प्रवेश दिया जा सकता है।
हरसिद्धि मंदिर में शुरू हो गई दर्शन की व्यवस्थाएं
हरसिद्धि मंदिर समिति के प्रबंधक अवधेश जोशी भी बुधवार दोपहर मंदिर पहुंचे। जोशी ने बताया मंदिर में व्यवस्थाओं की जानकारी लेने के लिए मंदिर गए थे। उन्होंने कहा मंदिर में दर्शनार्थियों के प्रवेश के संबंध में अभी कोई आदेश नहीं मिले हैं। इधर मंगलनाथ, कालभैरव मंदिर समिति से जुड़े लोगों ने मंदिर में दर्शनार्थियों के प्रवेश शुरू करने को लेकर तैयारी कर ली है लेकिन जब तक केंद्र सरकार की गाइडलाइन तय नहीं हो जाती, तब तक मंदिरों में फिर से दर्शन शुरू नहीं हो सकते। विदित रहे कि सामान्य दिनों में शहर के मंदिरों में 5 से 10 हजार लोग दर्शन के लिए आते हैं।